
ये प्रतिबन्ध कनाडा की न्यायाधीश किम्बरली प्रोस्ट और फ्रांस के जज निकोलस गुइलौ के साथ-साथ दो उप अभियोजकों, फिजी की नज़हत शमीम ख़ान और सेनेगल के मामे मंडियाये नियांग पर भी लगाए गए हैं.
ग़ौरतलब है कि इस तरह के प्रतिबन्ध, अतीत में चार अन्य न्यायाधीशों और ICC अभियोजक के ख़िलाफ़ भी लगाए गए थे.
निष्पक्ष न्यायिक संस्थान पर हमला
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रतिबन्धों के नए दौर की घोषणा करते हुए कहा कि ICC “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ख़तरा है जो संयुक्त राज्य अमेरिका और हमारे क़रीबी सहयोगी इसराइल के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई का एक साधन रहा है.”
संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायालय (ICC) ने इन प्रतिबन्धों की निन्दा करते हुए इसे “एक निष्पक्ष न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता पर एक घोर हमला” बताया.
इसके अलावा, “ये (प्रतिबन्ध) न्यायालय के सदस्य देशों, नियम-आधारित अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था और सबसे बढ़कर, दुनिया भर के लाखों निर्दोष पीड़ितों का अपमान भी करते हैं.”
गम्भीर अपराधों की जाँच
अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC), अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिन्ता के सबसे गम्भीर अपराधों – जनसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के विरुद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराधों की जाँच करता है.
यह नैदरलैंड के हेग में स्थित है और 1998 की एक सन्धि – रोम संविधि के तहत स्थापित किया गया था, जो चार साल बाद 2002 में लागू हुई.
संयुक्त राज्य अमेरिका और इसराइल इस सन्धि के पक्षकार बन चुके 125 देशों में शामिल नहीं हैं.
ICC ने, ग़ाज़ा में युद्ध के सिलसिले में, युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों का हवाला देते हुए, नवम्बर 2024 में, इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतानयाहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के साथ-साथ, हमास के एक पूर्व कमांडर के ख़िलाफ़ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे.
न्यायालय, मई 2003 में मित्र देशों द्वारा अफ़ग़ानिस्तान पर किए गए आक्रमण के बाद, वर्षों के युद्ध के दौरानअमेरिका सहित, सभी पक्षों द्वारा कथित रूप से किए गए युद्ध अपराधों की भी जाँच कर रहा है.
मज़बूत और अविचलित
न्यायालय ने दोहराया कि वह “अपने कर्मियों और अकल्पनीय अत्याचारों के पीड़ितों के साथ दृढ़ता से खड़ा है” और “किसी प्रतिबन्ध, दबाव या धमकी की परवाह किए बिना, देशों द्वारा अपनाए गए अपने क़ानूनी ढाँचे के अनुसार, अविचलित होकर, अपने आदेशों का पालन करता रहेगा.”
ICC ने, “देशों और मानवता व क़ानून के शासन के मूल्यों में भरोसा रखने वाले सभी लोगों से, न्यायालय और अन्तरराष्ट्रीय अपराधों के पीड़ितों के हित में किए गए उसके कार्यों को, दृढ़ और निरन्तर समर्थन प्रदान करने का आहवान भी किया.”
संयुक्त राष्ट्र ने, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय में आईसीसी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है और आगे कोई प्रतिबन्ध लगाए जाने के बारे में चिन्ता भी व्यक्त की है.
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा, “यह निर्णय अभियोजक के कार्यालय के कामकाज और वर्तमान में न्यायालय के समक्ष मौजूद सभी स्थितियों के सम्मान में गम्भीर बाधाएँ डालता है.”
“न्यायिक स्वतंत्रता एक बुनियादी सिद्धान्त है जिसका सम्मान किया जाना चाहिए, और इस प्रकार के तरीक़े, अन्तरराष्ट्रीय न्याय की बुनियाद को कमज़ोर करते हैं.”



