नई दिल्ली — उम्र सिर्फ एक संख्या है, और इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण हैं 84 वर्षीय डॉ. गिरिश मोहन गुप्ता, जो हाल ही में IIM संबलपुर से एमबीए पूरा करने के बाद अब अपनी तीसरी पीएचडी की तैयारी कर रहे हैं। वे एक ऐसे भारतीय वैज्ञानिक, उद्यमी और नवोन्मेषक हैं जिनके कार्यों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक ऑटोमेशन और ग्रामीण कृषि-प्रौद्योगिकी में क्रांति ला दी है।
ग्लोबल इंजीनियर्स लिमिटेड के संस्थापक और चेयरमैन, डॉ. गुप्ता 1983 से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं। दो अंतरराष्ट्रीय और 19 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित, जिनमें दो राष्ट्रपति पुरस्कार भी शामिल हैं, वे भारत के उन दुर्लभ वैज्ञानिकों में हैं जिन्होंने एक साथ उद्योग, समाज सेवा और शिक्षा—तीनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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🌱 प्रारंभिक जीवन: मूल्यों और प्रेरणा से भरपूर शुरुआत
10 अप्रैल 1941 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के दिबाई गांव में जन्मे डॉ. गुप्ता को बचपन से ही व्यवसाय, सेवा और आध्यात्मिकता की शिक्षा मिली।
उनकी मां लक्ष्मी देवी कृष्ण की अनन्य भक्त थीं, जिन्होंने अपने अंतिम 28 वर्ष गंगा तट पर राधा-कृष्ण मंदिर की सेवा में बिताए।
कई भाई-बहनों में से बड़े भाइयों के मार्गदर्शन ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया—एक इंजीनियर, एक पत्रकार और एक आध्यात्मिक गुरु।
ओशो का गहरा प्रभाव आज भी उनके विचार, नेतृत्व और जीवन शैली में स्पष्ट दिखाई देता है।
🎓 शिक्षा: उम्र नहीं, इच्छा मायने रखती है
- AMU से मैकेनिकल इंजीनियरिंग
- JS University से PhD
- IIM Sambalpur से 84 वर्ष की उम्र में MBA (CGPA 7.4)
- Golden Book of World Records में दर्ज
- अब तीसरी PhD के लिए रिसर्च जारी
इस उपलब्धि ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों का केंद्र बना दिया।
🏢 1983 में शुरू हुआ MSME से Defence Powerhouse तक का सफर
अमेरिका में Pittsburgh Steel Inc. में Vice President बनने के बाद 1983 में भारत लौटकर उन्होंने Global Engineers Limited की स्थापना की।
आज यह कंपनी—
✔ रक्षा
✔ परमाणु ऊर्जा
✔ रेलवे
✔ औद्योगिक ऑटोमेशन
में स्वदेशी तकनीक विकसित करती है।
कंपनी के योगदान:
- €55.6 मिलियन वार्षिक विदेशी मुद्रा बचत
- ₹1,020 करोड़ का टर्नओवर
- 1,200 रोजगार
- ₹105 करोड़ कर योगदान (1991–2025)
🔧 सबसे बड़े नवाचार: जिन्होंने भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कृषि को बदल दिया
1️⃣ उच्च सुरक्षा बाड़ – PTCC (1985)
भारत की पहली स्वदेशी Punched Tape Concertina Coil, जो पंजाब से लेकर राजस्थान, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर तक लगी।
✔ आतंकवाद रोकथाम
✔ विदेशी मुद्रा बचत
✔ राष्ट्रपति पुरस्कार (1986)
2️⃣ रेलवे वायु प्रदूषण समाधान – Automatic Painting Plants
भारत के 28 रेलवे वर्कशॉप्स और HAL में स्थापित।
3️⃣ Explosives & Propellant Plants (2010–2022)
गोला-बारूद निर्माण के लिए भारत के पहले स्वदेशी प्लांट विकसित।
✔ Nalanda & Bhandara Ordnance Factories में स्थापित
✔ ~₹500 करोड़ विदेशी मुद्रा बचत
4️⃣ 25 MW Thorium-based Fast Breeder Reactor
BARC के साथ पायलट रिएक्टर तैयार, 14 वर्ष से सफल संचालन।
5️⃣ Solar Greenhouse Technology (2017 Patented)
✔ उत्पादन 5–8 गुना तक बढ़ता
✔ प्रति एकड़ 400 यूनिट सौर बिजली
✔ IARI प्रमाणित
✔ किसानों की आय दोगुनी करने का मॉडल
✔ “तीसरी हरित क्रांति” का हिस्सा
6️⃣ Rural Telecommunication Model (1980s)
पहली बार ग्रामीण बसों को मोबाइल एक्सचेंज के रूप में उपयोग किया गया।
🏅 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. गुप्ता ने अब तक 19 राष्ट्रीय और 2 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रपति से राष्ट्रीय पुरस्कार (1986, 1987)
- IEI Industry Excellence Award
- SIDM Champion Awards
- CII Industrial Innovation Award
- इंडिया SME 100 Award
- The FORTTUNA Global Excellence Awards
- Outlook Planet C3 Award
वे Padma Shri (2025) के लिए नामांकित भी हैं।
❤️ समाज सेवा: विज्ञान और मानवता का संतुलन
मानसिक स्वास्थ्य
- Trustee, Brain Behaviour Research Foundation of India
- 3,000+ लोगों की मदद
महिला शिक्षा
- IIM Sambalpur में 22 छात्राओं को स्कॉलरशिप
गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह
- 50+ परिवारों की सहायता
वृद्ध एवं विकलांगों का कल्याण
- Earth Saviours Foundation को निरंतर योगदान
20 वर्षों से मुफ्त होम्योपैथी क्लिनिक
- हजारों मरीजों को सेवा
🚀 वर्तमान बड़ा प्रोजेक्ट: झांसी डिफेंस कॉरिडोर
166 हेक्टेयर भूमि पर भारत का पहला स्वदेशी Explosives & Rocket Propellant Manufacturing Plant स्थापित किया जा रहा है।
यह प्रोजेक्ट Make in India Defence को एक नई ऊंचाई देगा।
🧭 निष्कर्ष: उम्र से नहीं, दृष्टि से बनती है पहचान
डॉ. गिरिश मोहन गुप्ता का जीवन संदेश देता है कि—
“सीखना कभी रुकता नहीं, और सेवा कभी थकती नहीं।”
वे सिर्फ एक उद्यमी नहीं, बल्कि एक युगदृष्टा, पथ-प्रदर्शक और प्रेरणा हैं, जिनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भर भारत की राह दिखाती रहेगी।
📌 महत्वपूर्ण स्रोत (Authority References)
- Deccan Herald
- Odisha TV
- Kalinga TV
- Dev Discourse
- Dadidada Foundation
- Dr. Girish Gupta Official Website
- Global Engineers Ltd
- Golden Book of World Records



