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UNDP इक्वेटर पुरस्कार: भारत का स्व-सहायता समूह, 2025 के वैश्विक विजेताओं में शामिल


यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दुनिया भर के उन आदिवासी समुदायों और स्थानीय समूहों को सम्मानित करता है, जो प्रकृति-आधारित समाधानों के ज़रिये जलवायु सहनसक्षमता और सतत विकास को आगे बढ़ा रहे हैं.

भारतीय विजेता

भारत के कर्नाटक प्रदेश के शुष्क इलाक़ों में, जलवायु परिवर्तन से खेती लगातार अस्थिर हो रही है, ऐसे में वहाँ महिलाओं का एक सामूहिक समूह हालात बदल रहा है. उनकी सहनसक्षमता की इस पहल को, अब वैश्विक स्तर पर सराहना मिली है.

बीबीफ़ातिमा स्व-सहायता समूह को यूएनडीपी इक्वेटर पुरस्कार 2025 के 10 विजेताओं में शामिल किया गया है.

2018 में तीर्था गाँव की 15 महिलाओं के छोटे बचत समूह से शुरू हुआ यह संगठन, आज 30 गाँवों के 5 हज़ार से अधिक किसानों का सहारा बन चुका है.

यह संगठन बहु-फ़सली खेती, सौर ऊर्जा से चलने वाली प्रसंस्करण इकाइयों और 250 से अधिक देशी क़िस्मों को संरक्षित करने वाले बीज बैंकों को बढ़ावा देता है.

यह समूह, पारम्परिक ज्ञान को पुनर्योजी कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और बाज़ार तक पहुँच के साथ जोड़कर, जैव विविधता बहाल करने, खाद्य सुरक्षा मज़बूत करने और महिलाओं व युवाओं को “कृषि-उद्यमी” बनाकर जलवायु सहनसक्षमता और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ा रहा है.

बीबीफ़ातिमा स्व-सहायता समूह.

इसका विकेन्द्रीकृत और विस्तार योग्य मॉडल अब कई भारतीय प्रदेशों में अपनाया जा चुका है. यह पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करते हुए शुष्क भूमि खेती प्रणालियों को मज़बूत बनाता है.

9 अगस्त, आदिवासी जनजातियों के अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर घोषित इस वर्ष के पुरस्कार का विषय था – प्रकृति आधारित जलवायु कार्रवाई (Nature for Climate Action). इसमें ख़ासतौर पर महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व वाले समाधानों पर ज़ोर दिया गया.

भारत के लिए यह मान्यता इसलिए भी ख़ास है क्योंकि ज्वार-बाजरा (Millets) परिवार के अनाज को, कभी “मोटा अनाज” कहकर नज़रअन्दाज़ किया जाता था, मगर ये अनाज, अब जलवायु-कुशल सुपरफ़ूड के रूप में पहचाने जा रहे हैं.

मिलेट्स अनाज, संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2023 को अन्तरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित करने के बाद, वैश्विक ध्यान का केन्द्र बने हैं.

इक्वेटर पुरस्कार 2025 के अन्य विजेता

अर्जेंटीना में स्थानीय समुदाय की महिलाओं का सहकारी संगठन, पारम्परिक शिल्प को वैश्विक टिकाऊ उत्पादों में बदल रहा है.

अर्जेंटीना – कोऑपरेटिवा दे मुजेरेस आर्तेसानास डेल ग्रान चाको (Cooperativa de Mujeres Artesanas del Gran Chaco (COMAR)

स्थानीय समुदाय की 2,600 महिलाओं का यह सहकारी संगठन, Matriarca ब्रांड के ज़रिये, पारम्परिक शिल्प को वैश्विक टिकाऊ उत्पादों में बदल रहा है.

यह पहल जैव विविधता की रक्षा करती है, जलवायु सहनसक्षमता को मज़बूत बनाती है और महिला-नेतृत्वित शासन को बढ़ावा देती है.

ब्राज़ील का यह संगठन चार आदिवासी समुदायों को जोड़ता है और açaí फल पर आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाता है.

ब्राज़ील – असोसियासाओ उआसेई दोस पोवोस इंडीजनस दे ओयापोके (Associação Uasei dos Povos Indígenas de Oiapoque)

2022 में स्थापित यह संगठन चार आदिवासी समुदायों को जोड़ता है और açaí फल पर आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाता है.

यह स्थानीय मूल्य श्रृँखला और प्रसंस्करण उद्योग विकसित कर आर्थिक स्वतंत्रता दिलाता है, पारिस्थितिक संरक्षण सुनिश्चित करता है तथा युवाओं व महिलाओं की नेतृत्व भूमिका को मज़बूत करता है.

इक्वाडोर की हाखु अमेज़न फाउंडेशन की महिलाएँ.

इक्वाडोर – हाखु अमेज़न संस्थान (Hakhu Amazon Foundation)

हाखु अमेज़न संस्थान, आदिवासी युवाओं और महिलाओं के नेतृत्व में, पैरोकारी, उपनिवेश-विरोधी शिक्षा तथा ज़मीनी मीडिया के ज़रिये, इक्वाडोर के अमेज़न एवं स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है.

इसकी महिला क्षेत्रीय गार्ड ‘युतुरी वार्मी’ भूमि और जीवन की रक्षा करती है, जबकि हाखु अमेज़न डिज़ाइन सामाजिक उद्यम, किचवा महिलाओं को टिकाऊ आजीविका प्रदान करता है.

इंडोनेशिया में मित्रा BUMMA संगठन.

इंडोनेशिया – मित्रा BUMMA (Yayasan Menoken Indonesia Sejahtera Bumi Semesta)

तनाह पापुआ क्षेत्र में यह पहल एक लाख हैक्टेयर वर्षावन की रक्षा करती है और पारम्परिक ज्ञान व आधुनिक साधनों को जोड़कर 3 हज़ार से अधिक लोगों, ख़ासतौर पर महिलाओं, को सतत आजीविका और पारिस्थितिक संरक्षण में सशक्त बनाती है.

इंडोनेशिया का रानु वेलुम संगठन.

इंडोनेशिया – रानु वेलुम संस्थान (Ranu Welum Foundation)

इस दयाक महिला और युवा-नेतृत्व वाले संगठन ने, 1,000 से अधिक युवाओं को संगठित किया है, 3 हज़ार हैक्टेयर जंगल की रक्षा की है और पीटलैंड को बहाल किया है.

साथ ही, महिला अग्निशमन कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर सामुदायिक सुरक्षा एवं सांस्कृतिक संरक्षण को मज़बूत किया है.

उत्तरी केन्या की पशुपालक महिलाओं का संगठन.

केन्या – NaPO (Nature and People As One)

उत्तरी केन्या की पशुपालक महिलाएँ और युवजन, पारम्परिक पारिस्थितिक ज्ञान और किफ़ायती तरीक़ों से बंजर भूमि को पुनर्जीवित कर रहे हैं.

अब तक उन्होंने 550 हैक्टेयर भूमि की पुनर्बहाली की है और 10 हज़ार हैक्टेयर भूमि को सामुदायिक उपनियमों के तहत प्रबंधित किया है.

पपुआ न्यू गिनी में प्रवाल भित्तियों के संरक्षण प्रयासों में लगा संगठन.

पपुआ न्यू गिनी – SWoM (Sea Women of Melanesia)

आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित इस संगठन ने, 50 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर 1,500 हैक्टेयर प्रवाल भित्तियों का संरक्षण किया है. आधुनिक विज्ञान और पारम्परिक ज्ञान को मिलाकर इस संगठन ने, समुद्री पारिस्थितिकी की रक्षा में अहम योगदान दिया है.

पेरु में पहला आधिकारिक कृषि-जैव विविधता क्षेत्र.

पेरू – कुयोकुइयो टैरेसेस, पुनो (Cuyocuyo Terraces, Puno)

छह क़ुएचुआ समुदायों द्वारा संचालित पेरू का पहला आधिकारिक कृषि-जैव विविधता क्षेत्र, 6,500 हैक्टेयर प्राचीन सीढ़ीनुमा खेतों और 1,281 देशी फ़सल क़िस्मों की रक्षा करता है.

तंज़ानिया का टिकाऊ महासागर गठबन्धन.

स्याम – सोआ तंजानिया (सस्टेनेबल ओशन एलायंस तंजानिया)

2020 में स्थापित यह युवा-नेतृत्व वाला संगठन 100 हैक्टेयर सीग्रास बहाल कर चुका है, 20 हज़ार मैन्ग्रोव लगा चुका है और 130 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर चुका है.

इसका बहारी उद्यम, सतत समुद्री घास की खेती और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है.

वैश्विक महत्व

इन विजेताओं के साथ अब तक 84 देशों के 300 से अधिक सामुदायिक संगठनों को इक्वेटर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

प्रत्येक विजेता को 10 हज़ार अमेरिकी डॉलर दिए जाएँगे और वर्ष के अन्त में एक उच्च-स्तरीय ऑनलाइन समारोह में सम्मानित किया जाएगा.

साथ ही इन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा और ब्राज़ील के बेलें शहर में आयोजित होने वाले COP30 सम्मेलन जैसे वैश्विक मंचों पर अपने कार्य को प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा.

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