Homeश्रीलंका: इनसान-तेन्दुए की दुश्मनी, बीमा से समाधान

श्रीलंका: इनसान-तेन्दुए की दुश्मनी, बीमा से समाधान


श्रीलंकाई तेन्दुआ, बिल्ली प्रजाति का, इस द्वीप का एकमात्र बड़ा जीव और स्थल पारिस्थितिक तंत्र का शीर्ष शिकारी है. यह शाकाहारी जीवों की संख्या नियंत्रित करके सन्तुलन बनाए रखता है.

इसका अस्तित्व जैव विविधता के लिए ज़रूरी है और यह श्रीलंका के प्रकृति-आधारित पर्यटन का बड़ा आकर्षण भी है, जिससे हर साल हज़ारों पर्यटक विल्पत्तू, याला, कुमाना और हॉर्टन मैदानों जैसे उद्यानों में आते हैं.

लेकिन घटते आवास, जंगलों के विखंडन और शिकार की वजह से, तेन्दुओं के लिए उनका प्राकृतिक शिकार कम हो गया है. इसके कारण बहुत से तेन्दुए, गाँवों और मानव-प्रधान क्षेत्रों में पहुँच जाते हैं, जहाँ वे पशुधन का शिकार करते हैं.

इससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुक़सान होता है और बदले में तेन्दुओं की हत्याएँ होती हैं.

इस नई पशुधन बीमा योजना के तहत तेन्दुए द्वारा मारे गए पशुधन के लिए किसानों को तुरन्त मुआवज़ा दिया जाता है.

वन्यजीव संरक्षण विभाग के महानिदेशक रणजन मरासिंघे बताते हैं, “यह कार्यक्रम तेन्दुआ संरक्षण के लिए, सही समय पर उठाया गया एक क़दम है.”

“तेज़ और न्यायसंगत मुआवज़ा किसानों को राहत देता है, प्रतिशोधात्मक हत्याओं को घटाता है और आजीविका व श्रीलंका के इस प्रतीकात्मक शिकारी दोनों की रक्षा करता है.”

शोध से वास्तविक समाधान की ओर

सिगिरिया क्षेत्र के सर्वेक्षणों में पता चला कि बफ़र ज़ोन वाले गाँवों में पशुधन पर लगातार हमले होते हैं और इस कारण कई बार चोरी-छुपे, ज़हरीले चारे, फन्दों और गोलीबारी से तेन्दुओं की हत्याएँ की गईं.

इसी स्थिति के समाधान के लिए पशुधन क्षतिपूर्ति कार्यक्रम शुरू किया गया, जिससे किसानों को तुरन्त राहत देकर, तेन्दुआ संरक्षण के लिए भरोसा व सहयोग बढ़ाया जाए तथा डेटा एकत्र करके, संघर्ष-निवारण की रणनीतियों को बेहतर बनाया जा सके.

LOLC बीमा के अध्यक्ष कित्सिरी गुणवर्धना का कहना है, “यह पहल, संरक्षण की अहम ज़रूरत पूरी करने के साथ, ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को सहारा देती है और ऐसे समाधान प्रस्तुत करती है जिनमें समुदाय और वन्यजीव दोनों साथ फल-फूल सकें.”

योजना कैसे काम करती है

यूएनडीपीइस बीमा योजना की वित्तीय लागत वहन करेगा और LOLC बीमा पॉलिसी मुहैया कराएगा.

पशुधन का नुक़सान होने पर किसान, क्षेत्रीय अधिकारी को जानकारी देंगे.

वन्यजीव संरक्षण विभाग, पशु चिकित्सक और ग्राम निलधारी अधिकारी मिलकर तुरन्त जाँच करेंगे. उचित पाए जाने पर दावा तेज़ी से निपटाया जाएगा और किसानों को आमतौर पर 72 घंटों के भीतर मुआवज़ा मिल जाएगा.

श्रीलंका में UNDP की स्थानीय प्रतिनिधि अज़ुसा कुबोटा कहती हैं, “हम इस पहल के स्वरूप और पहुँच को मज़बूत कर रहे हैं. ज़मीनी अभियानों के ज़रिए किसानों और संरक्षण कर्मियों को जोड़ रहे हैं और इसे राष्ट्रीय नीतियों में शामिल कर रहे हैं.”

“साथ ही हम नए वित्तीय उपायों का परीक्षण कर रहे हैं ताकि सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा सके, ख़ासतौर पर भूमि संरक्षण और सतत समुदायों से जुड़े लक्ष्यों को.”

यह कार्यक्रम, नक़द मुआवज़ा मुहैया कराने के साथ, रोकथाम के उपायों को भी बढ़ावा देता है, जैसेकि शिकारी-रोधी रात्रि बाड़े, सामुदायिक पशु शालाएँ और मवेशी बैंक प्रणाली, जो नक़द भुगतान के बजाय पशु उपलब्ध कराती है.

पशुधन बीमा योजना के औपचारिक शुभारम्भ के दौरान साझेदार संगठनों के प्रतिनिधि.

समग्र दृष्टिकोण

यह बीमा योजना, मुआवज़े को, तेन्दुओं की हत्याओं की रोकथाम, शोध और सामुदायिक भागेदारी से जोड़कर, मानव व तेन्दुआ के बीच हो रहे संघर्ष का एक समग्र समाधान प्रस्तुत करती है.

यह योजना, किसानों की आर्थिक वास्तविकताओं को स्वीकार करते हुए, तेन्दुए के पारिस्थितिकी महत्व को उजागर करती है.

संरक्षण दो-तरफ़ा रास्ता है – लोगों को पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए तेन्दुओं की ज़रूरत है और तेन्दुओं को जीवित रहने के लिए इनसानों की.

ऐसे में यह पहल, श्रीलंका की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा और समुदायों व वन्यजीवों के बीच सहअस्तित्व को बढ़ाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है.

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