Homeजलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में, सुरक्षित जल प्रबन्धन पर बल

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में, सुरक्षित जल प्रबन्धन पर बल



विश्व स्वास्थ्य संगठन (कौन) का कहना है कि दुनिया भर में 2.2 अरब लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था का अब भी अभाव है, जबकि इस अहम संसाधन की मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है.

स्टॉकहोम में आयोजित बैठक में जल और वैश्विक तापमान में वृद्धि के बीच कड़ी को रेखांकित किया गया है, और जलवायु कार्रवाई में जल की भूमिका पर विमर्श हो रहा है.

टिकाऊ विकास, मानव अस्तित्व, सामाजिक-आर्थिक विकास, ऊर्जा व खाद्य उत्पादन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए सुरक्षित पेयजल बहुत आवश्यक है.

एक ऐसी दुनिया जहाँ तापमान निरन्तर बढ़ रहा है, वहाँ जल की भरोसेमन्द आपूर्ति, जलवायु अनुकूलन प्रयासों के केन्द्र में है.

भूमिबद्ध देश

विश्व के विभिन्न देशों में दूरदराज में स्थित क्षेत्रों में जल सुलभता में बेहतरी आने से स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं, विशेष रूप से भूमिबद्ध विकासशील देशों में.

जल मामलों के लिए यूएन संस्था, UN Water बुधवार को उन भूमिबद्ध विकासशील देशों के साथ चर्चा का आयोजन किया है, जिन्होंने सर्वजन के लिए जल व साफ़-सफ़ाई के मुद्दे पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है.

भूटान, रवांडा और सऊदी अरब इस चर्चा में अपने अनुभव और सुरक्षित पेयजल व कारगर जल प्रबन्धन के विषय में अपने सबक़ साझा करेंगे.

वित्त पोषण की आवश्यकता

जल के सुरक्षित प्रबन्धन, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता सेवाओं के अभाव से, मानव कल्याण, गरिमा व अवसरों पर असर होता है, विशेष रूप से महिलाओं व लड़कियों के लिए.

दूषित जल, साफ़-सफ़ाई की अपर्याप्त व्यवस्था और गंदगीपूर्ण तौर-तरीक़ों की वजह से अत्यधिक निर्धनता के विरुद्ध लड़ाई कमज़ोर हो रही है और विश्व के सबसे निर्धन देशों में बीमारियों का प्रकोप है.

इसके मद्देनज़र, जल से जुड़े मामलों के लिए यूएन संस्था अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर दानदाताओं की लामबन्दी के प्रयास करेंगे ताकि मौजूदा कमियों को दूर किया जा सके. साथ ही, जल की सार्वभौमिक सुलभता सुनिश्चित करने के इरादे से नवाचारी उपायों पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.

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