
दरअसल, दुनिया काली मिर्च की जितनी खपत होती है, उसमें से लगभग 75 प्रतिशत काली मिर्च, एशिया में उगाई जाती है. योरोपीय संघ में जर्मनी, काली मिर्च का सबसे बड़ा आयातक है, और उसकी हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है.
2024 में जर्मनी में जैविक काली मिर्च उत्पादों की बिक्री 24 प्रतिशत बढ़ी है. उपभोक्ता अब पारदर्शी आपूर्ति श्रृँखला वाले जैविक और नैतिक रूप से प्राप्त उत्पादों को अधिक पसन्द कर रहे हैं.
काली मिर्च, योरोप में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला मसाला है, लेकिन कम्बोडिया जैसे देशों के छोटे किसानों के लिए योरोपीय संघ के कड़े मानकों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण रहता है.
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. कम्बोडिया में किसान अब एक ख़ास तरह की काली मिर्च उगा रहे हैं – उच्च गुणवत्ता वाली जैविक क़िस्में, जिन्हें उनके अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है.
अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (अभिव्यक्ति) की एक परियोजना के तहत, किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उनके उत्पाद अन्तरराष्ट्रीय, विशेष रूप से योरोपीय संघ के गुणवत्ता मानकों पर ख़रे उतर सकें.
इस पहल के तहत सहकारी समितियाँ गठित की गई हैं, जिससे किसानों को अन्तरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ा गया है. इससे क़ीमतें स्थिर हुईं है और किसानों की औसत आमदनी में लगभग 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. (वीडियो)



