सोमालिया के अधिकारियों के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय सहायता राशि में कटौती से, देश में लगभग 46 लाख लोग प्रभावित हैं, जोकि देश की लगभग एक चौथाई यानि 25 प्रतिशत आबादी है.
OCHA के अनुसार साझीदारों संगठनों से संकेत दिए हैं कि पानी की क़ीमतों में उछाल, खाद्य सामग्री की बढ़ती क़िल्लत, मवेशियों की मौतें और आजीविकाएँ ख़त्म होने के हालात में, सितम्बर से दिसम्बर के बीच लगभग एक लाख 20 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं.
उनके अलावा, देश भर में 75 हज़ार से अधिक छात्रों को, अपनी स्कूली शिक्षा बन्द करनी पड़ी है.
यूएन एजेंसी का ये भी कहना है कि जनवरी से मार्च तक, आगामी सूखा मौसम, सूखे के हालात को और बिगाड़ने वाला है, जिसमें पानी की क़िल्लत और बढ़ेगी, मवेशियों की मौतें होंगी, और देश के अनेक हिस्सों में खाद्य असुरक्षा की स्थिति और बदतर हो जाएगी.
OCHA की नवीनतम जानकारी में बताया गया है कि यूएन और उसके साझीदार संगठन आकलनों में मदद करने के साथ-साथ, पानी, खाद्य सामग्री, पोषण, स्वास्थ्य और आश्रय क्षेत्रों में आपात कार्रवाई में सहयोग दे रहे हैं.
मानवीय सहायता एजेंसियाँ लोगों को नक़दी सहायता और पशुओं का चारा मुहैया कराने के साथ-साथ, कुओं को भी बहाल कर रही हैं.
मगर सहायता एजेंसियों के प्रयास, धन की भारी क़िल्लत के कारण बाधित हो रहे हैं.
आपात राशि पर्याप्त नहीं
संयुक्त राष्ट्र के आपदा राहत समन्वयक टॉम फ़्लैचर ने, पिछले महीने यानि नवम्बर में, केन्द्रीय आपदा सहायता कोष (सर्फ़) से, सोमालिया के लिए एक करोड़ डॉलर की रक़म आवंटित की थी.
इस राशि से, टकराव व युद्ध और जलवायु सम्बन्धी आपदाओं में, लोगों को अत्यन्त आवश्यक सहायता मुहैया कराई जाती है, मगर एजेंसी का कहना है कि इससे कहीं अधिक धनराशि की तत्काल आवश्यकता है.
वर्ष 2025 समाप्त होने वाला है, और सोमालिया के लिए, इस वर्ष के दौरान मानवीय सहायता की ख़ातिर एक अरब 40 करोड़ डॉलर की राशि जुटाने की जो आपील जारी की गई थी, उसके जवाब में अभी तक केवल 37 करोड़ डॉलर की राशि ही प्राप्त हुई है, जोकि कुल अपील राशि का लगभग एक चौथाई है.
इस धन क़िल्लत के कारण, जीवन रक्षक कार्यक्रम चलाने के लिए धन की भारी कमी जारी है.



