इसी वर्ष अक्टूबर में, समरकन्द में हुए यूनेस्को के महासम्मेलन में, 15 दिसम्बर को हर साल विश्व तुर्किक भाषा परिवार दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया था.
इस दिवस के समारोहों के ज़रिए, बहुभाषावाद और सांस्कृतिक विविधता के लिए यूनेस्को की प्रतिबद्धता की भी पुनःपुष्टि की जाएगी.
एक ऐतिहासिक तारीख़
इस दिवस के लिए 15 दिसम्बर को चुने जाने के निर्णय का मूल, भाषाई विद्वता के एक ऐतिहासिक क्षण में नीहित है. 1893 में उस दिन, डेनमार्क के एक भाषा विद्वान विलहेल्म थॉमसेन ने घोषणा की थी कि उन्होंने ओरख़ॉन लिपियों के अक्षरों को पढ़कर उनकी पहेली को सुलझा लिया है.
उन लिपियों को, तुर्किक भाषा परिवार के सबसे पुराने लिखित रिकॉर्ड्स में माना जाता है.
उनकी इस उपलब्धि ने एक ऐसी भाषाई परम्परा को गहराई से समझने के दरवाज़े खोल दिए जो आज के समय में, योरोएशिया में अनेक समुदायों को आपस में जोड़ती है.
एक वैश्विक भाषाई परिवार
तुर्किक परिवार की भाषाओं में अज़रबेजानी, कज़ाख़, किरगिज़, तुर्की, तुर्कमेन और उज़बेक शामिल हैं जो 20 करोड़ से अधिक लोगों की मातृ भाषाएँ हैं और ये लोग जिस क्षेत्र में बसते हैं उसका दायरा लगभग एक करोड़ 20 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है.
यूनेस्को ने कहा है कि इन भाषाओं की एक समृद्ध लिखित विरासत है, मज़बूत मौखिक परम्पराएँ हैं और ऐसी विविध सांस्कृतिक परिम्पराएँ हैं जिन्हें अनेक सदस्य देश साझा करते हैं.
इस दिवस की स्थापना के लिए अज़रबैजान, कज़ाख़्स्तान, किरगिस्तान, तुर्कीये और उज़बेकिस्तान ने संयुक्त रूप से अनुरोध किया था और इस प्रस्ताव को 21 सदस्य देशों का समर्थन मिला.
बहुभाषावाद के साथ मेल
यूनेस्को का कहना है कि इस दिवस को हर साल मनाया जाना, संयुक्त राष्ट्र के वृहद बहुभाषावाद एजेंडा से मेल खाता है, जिसे यूएन महासभा के प्रस्ताव संख्या 71/328 में वर्णित किया गया है.
तुर्किक भाषा परिवार दिवस मनाकर, यूनेस्को का उद्देश्य, सभ्यताओं के दरम्यान भाषाई सहयोग, सांस्कतिक आदान-प्रदान और संवाद को बढ़ावा देना है.
इस दिवस के दौरान प्रदर्शनियाँ, भाषण, साहित्यिक कार्यक्रम और कला कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें तुर्किक भाषाओं की ऐतिहासिक गहराई और सामयिक अहमियत को दिखाया जाएगा.



