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कोशिशें रंग लाईं, तीन अफ़्रीकी धरोहरें ख़तरे की सूची से बाहर, उम्मीदें हुईं बहाल


ये तीनों स्थल अब ‘ख़तरे में पड़ी विश्व विरासत सूची’ से बाहर आ गए हैं.

यह फ़ैसला पेरिस में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की बैठक में लिया गया, जो दर्शाता है कि संरक्षण, सहयोग और संकल्प के संगम से हर विरासत को नया जीवन दिया जा सकता है.

समिति ने अफ़्रीका महाद्वीप के तीन ऐतिहासिक स्थलों: मैडागास्कर के अटसिनानाना के वर्षावन, मिस्र के अबू मेना तीर्थ स्थल और लीबिया के ग़दामेस प्राचीन नगर, को ‘ख़तरे में पड़ी विश्व विरासत’ की सूची से हटा दिया.

यह निर्णय उन तमाम संरक्षकों, वैज्ञानिकों, स्थानीय समुदायों और सरकारों की मेहनत का नतीजा है, जिन्होंने इन धरोहरों को बर्बादी से बचाने में अहम भूमिका निभाई.

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले का कहना है, “जब कोई धरोहर इस सूची से बाहर आती है, तो यह सबकी जीत होती है.”

उन्होंने यह भी बताया कि अफ़्रीकी देशों के लिए विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने और नई विरासतों को सूचीबद्ध कराने की दिशा में यूनेस्को विशेष प्रयास कर रहा है.

अटसिनानाना वर्षावन फिर आबाद

मडागास्कर के अटसिननाना के वर्षावन.

जैव विविधता की दृष्टि से विशेष माने जाने वाले अटसिनानाना के वर्षावनों को, 2007 में विश्व विरासत सूची में जोड़ा गया था.

लेकिन, अवैध कटाई, बहुमूल्य लकड़ियों की तस्करी और वनों की अन्धाधुन्ध कटाई ने इस क्षेत्र को गम्भीर संकट में डाल दिया. इसका नतीजा ये हुआ कि वर्ष 2010 में इसे ‘ख़तरे में’ की सूची में डालना पड़ा.

मगर, इसे बहाल करने के प्रयास भी जारी रहे. इसके लिए सैटेलाइट निगरानी, स्थानीय गश्त, और गुलाबी व आबनूस लकड़ी की कटाई पर कड़ी रोक की मदद से, 63 फ़ीसदी वन क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया.

यहाँ लीमर यानि विशेष प्रजाति के बन्दरों शिकार अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच चुका है, और आज यह वर्षावन एक बार फिर से साँस ले रहा है.

अबू मेना: जल संकट से मुक्ति

मिस्र का अबू मेना तीर्थ स्थल

© यूनेस्को / स्वास्थ्य chucent विंसेंट

मिस्र का अबू मेना एक प्रमुख तीर्थस्थल और ईसाई मठवाद है, जो 1979 में विश्व विरासत बना. लेकिन 2001 में आसपास के खेतों की सिंचाई के कारण जल स्तर में ख़तरनाक वृद्धि और कई संरचनाओं के ध्वस्त होने के कारण इसे स्थल को, ख़तरे की सूची में डाला गया था.

2021 में सौर ऊर्जा से चलने वाली जलनिकाय प्रणाली ने भूजल स्तर को कम करके संरचनाओं को स्थिर किया.

वर्ष 2024 में यूनेस्को की मदद से बनाए गए संरक्षण योजना ने प्रभावी रणनीतियाँ लागू कीं और स्थानीय समुदायों की भागेदारी बढ़ाई.

यह एक सुन्दर उदाहरण है कि परम्परा और तकनीक साथ मिलकर भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं.

ग़दामेस विरासत की बहाली

वर्ष1986 में, यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल यह प्राचीन शहर अफ़्रीका और भूमध्य सागर क्षेत्र की संस्कृतियों का संगम रहा है.

यूनेस्को/डब्ल्यूएचसी/जीन-जैक्स गेलबार्ट

वर्ष 1986 में, यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल लीबिया का प्राचीन शहर ग़दामेस, अफ़्रीका और भूमध्य सागर क्षेत्र की संस्कृतियों का संगम रहा है. लीबिया में, टकराव, जंगल की आग और भारी बारिश के कारण यह स्थल, 2016 से ख़तरे की सूची में था.

स्थानीय प्रशासन और साझीदारों की पहल से ऐतिहासिक इमारतों, नालियों और पारम्परिक संरचनाओं की बहाली हुई. साथ ही, स्थानीय कौशल और प्रशासन को मज़बूत करने के लिए प्रशिक्षण और जोखिम प्रबन्धन योजना विकसित की गई.

यूनेस्को की यह घोषणा प्रमाण है कि संरक्षण केवल ईंट-पत्थरों का कार्य नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का जश्न है, एक ऐसा उत्सव जो अफ़्रीका से दुनिया भर तक फैल सकता है.

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